सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत सरकार ने 2017 तक
सम्पूर्ण भारत को गन्दगी मुक्त करने के लिये 1999 में अभियान चलाया। यह कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश में 2002 में लागू हुआ। इस योजना के तहत समाज के विभिन्न वर्गों को अपने
घरों में शौचालय बनाने के लिये अनुदान दिया गया।
2002 में
अनुदान राशी 600 रु थी और अब यह लगभग 4500 रु है।
पंचायती
राज्य विभाग के अनुसार 1 करोड़ 71 लाख
शौचायलों का निर्माण सरकार ने करवाया है जबकि
जनगणना विभाग के अनुसार केवल 55 लाख परिवारों में शौचालय
हैं अर्थात 1 करोड़ 16 लाख शौचालय गुम हो गये हैं
परन्तु
जनगणना में इसकी सच्चाई खुल गयी। सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अनुसार ग्रामीण उत्तर
प्रदेश में केवल 17% घरों मे शौचालय
सुविधा नहीं है परन्तु जनगणना अधिकारियों के अनुसार 78% घरों में पक्के शौचालय नहीं हैं। भ्रष्टाचार
की सीमा यहीं समाप्त नही होती, अभियान के अधिकारियों के अनुसार
लखीमपुर खीरी और फ़र्रुखाबाद जैसे ज़िलों में 100% घरों में शौचलाय
की व्यवस्था है परन्तु जनगणना अधिकारियो के अनुसार इन्ही ज़िलों में क्रमश:
82% एवं 76% घरों में शौचालय नहीं हैं। सरकारी
आंकड़ों के अनुसार 90 लाख परिवार भारत में बिना पक्के शौचालयों के हैं
जिसमें से 39% या 35 लाख परिवार उत्तर प्रदेश
में हैं। इस आंकलन से लगता है कि लगभग
2900 करोड़ रु का सरकार को चूना लग चुका है। पर ज्ञात रहे अभी यह
सब आंकड़े सरकारी हैं
देश को ले कर आ गये हम किस मुकाम पर
घोटाले होने लगे हैं अब शौचालय के नाम पर
भ्रष्टाचार में भी आ गया देखो अब ऐसा मोड़
शौचालय के नाम पर खाये गये 2900 करोड़
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