अब
आपको भारत सरकार के एक निर्णय के विषय में खुलासा करते हैं!
भारत
सरकार ने इस बजट में स्वर्ण निर्यात में शुल्क को 2% से 4% कर दिया और सभी स्वर्ण
आभूषणों पर 0.3%
का आबकारी शुल्क लगा दिया।
(1) इसके फ़लस्वरूप भारत जो विश्व में सबसे अधिक सोने का आयात करता है (2011 मे 967
ट्न) का अनुमानत: आयात 30% कम होने की आशंका है
(2) सरकार के खज़ाने में लगभग 100 रु प्रति ग्राम का धन आयेगा
(3) भारत का स्वर्ण उध्योग जिसमें 98% छोटे दुकानदार है और जो कारीगर है उनकी रोज़ी
रोटी पर सीधी मार क्योंकि इस स्तर का है कि आबकारी विभाग से समबन्धी कागज़ात बनाने
में सक्षम ही नहीं है
(4) अनुमानत: लगभग एक करोड कारीगरों के जीवन पर दुष्प्रभाव होगा
आईये अब समझते हैं कि इससे भ्रष्टाचार कैसे बढेगा !
(1) जब अधिकांश लोग सोने के ज़ेवर बिना बिल के खरीदेंगे तो (1000 रु प्रति तोला
सस्ता) बिक्री कर विभाग के अधिकरियों के भ्रष्टाचार का बोलबाला
(2) हर छोटे से छोटे कारीगर को आबकारी विभाग मे पंजीकरण करवाना होगा और रोज़नामचा,
रोज़ की आवक, रोज़ की बिक्री और रोज़ का लेजर बनाना होगा। कल्पना करें कि एक दुकानदार
या कारिगर जिसकी मासिक आय 10,000 से 30,000 के बीच में है (60 लाख लोग) इतना लेखा
जोखा रखने की न तो क्षमता रखता है न ही किसी लेखाकार को काम दे सकेगा परिणाम होगा
फ़िर भ्रष्टाचार
अब यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार बढाने में
सरकारी तन्त्र महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है
sarkari tantra isliye hi bane hai, ke unka upyog janta ko lutne me kiya ja saaKE.
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