Wednesday, 30 May 2012

उदारीकरण का प्रभाव


उदारीकरण से पहले
1990 भारत पर विदेशी कर्ज़ा 8380 करोड़ डालर = 146650 करोड़ रुपये (1 डालर = 17.50 रुपये)
उदारीकरण के 22 साल बाद
2012 भारत पर विदेशी कर्ज़ा 33490 करोड़ डालर = 1741480 करोड़ रुपये (1 डालर = 52.50 रुपये)
डालर मे कर्ज़ा बढा 4 गुना
रुपये में कर्ज़ा बढा 11.8 गुना
आज बच्चा बच्चा जन्म से पहले 14392 रुपये का कर्ज़दार
उदारीकरण के पुरोधा श्री मनमोहन सिंह की जय 

Tuesday, 29 May 2012

रुपौए का अवमूल्यान


रुपये का अवमूल्यन क्यों होता है ?
विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के दबाव के कारण
भारत दबाव स्वीकार क्यों करता है ?
डालर का कर्ज़ा लेने के लिये
डालर क्यों चाहिये ?
आयात करने के लिये
आयात क्या करते हैं ?
विभिन्न विदेशी सामान जिसमें पेट्रोल, खाद्द्यान्न पदार्थ, कपडे मशीन के पुर्ज़े और मशीन शामिल हैं
इस अवमूल्यन से क्या होता है ?
आयात महंगा और निर्यात सस्ता
अभी आयात निर्यात कितना है ?
इस वर्ष आयात 485 अरब डालर और निर्यात 300 अरब डालर यानि 185 अरब डालर का घाटा
आज के भाव पर यह क्या होता ?
आयात 565 अरब डालर और निर्यात 257 अरब डालर यानि 308 अरब डालर का घाटा
इससे फ़ायदा किसको है ?
समस्त देशी और विदेशी कम्पनियों को जो निर्यात करती हैं
इससे नुक्सान किसको है ?
समस्त देशी कम्पनियों को जो आयात करती हैं
हम क्या कर सकते है ?
उस सब सामान का बहिष्कार जो विदेशी है।
इससे क्या होगा ?
विदेशी कम्पनी आयात नहीं करेगी और डालर खर्च नहीं होगा।  
अमेरिका का राष्ट्रपति अपनी संसद अभिभाषण मे यदि लोगों से अपील कर सकता है तो हमारा राष्ट्रपति या प्रधान मन्त्री क्यों नहीं ?
वहां का राष्ट्रपति देश का सेवक है और यहां का राष्ट्रपति या प्रधान मन्त्री देश का दलाल

Tuesday, 15 May 2012

भ्रष्टाधिराज श्री सुरेश कलमाड़ी


महाराष्ट्र के विशिष्ट मन्त्री मण्डल में भ्रष्टाधिराज श्री सुरेश कलमाड़ी की उपस्थिती यह बताने के लिये पर्याप्त है कि उन्हे भारत के प्रधान मन्त्री का संरक्षण प्राप्त है यह चित्र 10/05/2012 का है 

माननीय प्रणव मुखर्जी


लोकसभा में सुषमा स्वराज जी के प्रश्न के उत्तर में माननीय प्रणव मुखर्जी ने बताया कि भारत जल्द से जल्द गेहूं को भरने के लिये बारदान की बोरियां आयात करेगा
प्रश्न है कि 820 लाख करोड़ के सकल घरेलू उत्पाद का देश बारदान की बोरी बनाने में अक्षम है?

कहीं ऐसा तो नहीं कि नेताओं को इसमें भी दलाली खानी है
प्रणव दादा ने घरेलू उत्पादकों से पूछने का कष्ट भी नहीं किया और ऐसा लगा की वो केवल प्रश्न पूछने की प्रतीक्षा में थे उत्तर पहले से ही तैय्यार था  

अपील

समस्त राष्ट्र प्रेमी सज्जनों से अपील है कि यदि इस बार के दिल्ली के या किसी भी प्रदेश के चुनाव में आपकी जानकारी में कोई ईमानदार प्रत्याशी चुनाव लड़ा था, वह हारा या जीता, आप सब उनका सामूहिक स्वागत करें, उत्साहवर्धन करें और सामूहिक सन्मान दें जिससे कि ऐसे ईमानदार लोग फ़िर अगली बार देश सेवा में नए उत्साह से जा सकें।    

Sunday, 13 May 2012

NCERT कार्टून का सच


शुक्रवार 11/05/2012 को लोक सभा की कार्यवाही को एक एन सी ई आर टी की पुस्तक में छपे कार्टून के विवाद के चलते स्थगित हो गयी।
उस दिन श्री चिदंबरम ने एयरसेल-मैक्सिस डील मामले में अपने सफ़ाई देनी थी और यह मुद्दा बहुत ज़ोर पकड़ चुका था।
अब कार्टून की कहानी भी देखिये यह पचास के दशक का कार्टून है जिसे श्री केशव शंकर पिल्लई ने बनाया था, जिन्हे भारत सरकार ने पदम श्री, पदम भूषण और पदम विभूषण से सन्मानित किया है। यह कार्टून 2006 से राजनीतिक विज्ञान की पुस्तकों में छप रहा है तो अचानक से 2012 में क्या हुआ की समस्त तथाकथित राष्ट्रप्रेमी सज्जनों नींद खुल गयी।
परिणाम या दुष्परिणाम:
श्री चिदंबरम का एयरसेल-मैक्सिस डील मामला सुस्त पड़ गया।
दूसरे क्योंकि समय कम है इन पुस्तकों का ठेका किसी निजी संस्थान को दे दिया जायेगा और नेताओं की फ़िर कमीशन और पैसा स्विस बैंक में।    

परिणाम रू 25,000 प्रति मिनट के खर्चे वाली सन्सद  दिन भर स्थगित रही।   

Sunday, 6 May 2012

हिलेरी क्लिंटन


अमेरिका की विदेश मन्त्री हिलेरी क्लिंटन भारत की राजधानी में आने से पहले कोलकता में आयेंगी
कारण बताया जा रहा है: कूटनीतिक और राजनैतिक वार्ता
असली कारण : ममता जी ने खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश में विरोध किया था
समाधान : कूटनीतिक और राजनैतिक समझौता
धन्य है ममता माता की देश के प्रति ममता
राजनैतिक वार्ता, समझौता या सौदा ?

Wednesday, 2 May 2012

सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान


सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत सरकार ने 2017 तक सम्पूर्ण भारत को गन्दगी मुक्त करने के लिये 1999 में अभियान चलाया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में 2002 में लागू हुआ। इस योजना के तहत समाज के विभिन्न वर्गों को अपने घरों में शौचालय बनाने के लिये अनुदान दिया गया।
2002 में अनुदान राशी 600 रु थी और अब यह लगभग 4500 रु है।
पंचायती राज्य विभाग के अनुसार 1 करोड़ 71 लाख शौचायलों का निर्माण सरकार ने करवाया है जबकि जनगणना विभाग के अनुसार केवल 55 लाख परिवारों में शौचालय हैं अर्थात 1 करोड़ 16 लाख शौचालय गुम हो गये हैं  
परन्तु जनगणना में इसकी सच्चाई खुल गयी। सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के अनुसार ग्रामीण उत्तर प्रदेश में केवल 17% घरों मे शौचालय सुविधा नहीं है परन्तु जनगणना अधिकारियों के अनुसार 78% घरों में पक्के शौचालय नहीं हैं। भ्रष्टाचार की सीमा यहीं समाप्त नही होती, अभियान के अधिकारियों के अनुसार लखीमपुर खीरी और फ़र्रुखाबाद जैसे ज़िलों में 100% घरों में शौचलाय की व्यवस्था है परन्तु जनगणना अधिकारियो के अनुसार इन्ही ज़िलों में क्रमश: 82% एवं 76% घरों में शौचालय नहीं हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 90 लाख परिवार भारत में बिना पक्के शौचालयों के हैं जिसमें से 39% या 35 लाख परिवार उत्तर प्रदेश में हैं। इस आंकलन से लगता है कि लगभग 2900 करोड़ रु का सरकार को चूना  लग चुका है। पर ज्ञात रहे अभी यह सब आंकड़े सरकारी हैं     

देश को ले कर आ गये हम किस मुकाम पर
घोटाले होने लगे हैं अब शौचालय के नाम पर
भ्रष्टाचार में भी आ गया देखो अब ऐसा मोड़
शौचालय के नाम पर खाये गये 2900 करोड़    
  

Wednesday, 25 April 2012

गरीबों के अनाज का भ्रष्टाचार


गैट करार के बाद भारत को प्रति वर्ष खाद्दय सामग्री का आयात बढाना है:
परिणामस्वरूप खाद्दय सामग्री के आयात की स्थिति:
वर्ष
कुल आयात करोड़ रुपये
खाद्दय पदार्थ
प्रतिशत
1995
122678
3243
2.6%
2003
297205
11668
3.9%
2007
840506
19430
3.1%
2011
1605314
39732
3.0%
 क्या भारत सरकार के पास इस बात का उत्तर है कि जिस देश में 2-3 लाख टन अनाज चूहे खा रहे हैं, गोदाम की कमी के कारण अनाज खुले में सड़ रहा है, ऐसे खाद्दयान्न सम्पन्न देश में खाद्द पदार्थ का आयात क्यों बढ रहा है?
एक लाख लोगों का भोजन भ्रष्टाचार की भेंट चढ गया
अभी हाल में ही शाहीद भगत सिंह नगर में खाद्द विभाग ने 2,64,000 बोरियां गेहूं की खरीदी और 94,000 बोरियां गोदाम में सम्भाल कर रख ली। परन्तु शेष 1,70,000 बोरियां खुले में छोड़ दी थी। समाचार आया है कि सारा का सारा गेहूं सड़ चुका है।
यह स्थिती तब है जब माननीय अदालत ने सरकार से कहा है कि अनाज सड़ने से पहले गरीबों मे मुफ़्त बांट दिया जाय
कलपना करें कि इस 64,00,000 किलो गेहूं से भारतीय आंकड़ों के अनुसार 1,00,000 लोगों को साल भर का भूख से बचाया जा सकता था।
   एक लाख लोगों का भोजन भ्रष्टाचार की भेंट चढ गया

Monday, 23 April 2012

खाद्दयान्न का 35,000 करोड़ रु का सच


द हिन्दुस्तान टाईम्स 22/04/2012 के अनुसार
सी बी आई ने शनिवार को 35,000 करोड़ रु के घोटाले की छानबीन के तहत 500 लोगों का नाम एफ़ आई आर दर्ज की है। खाद्दयान्न विभाग के लोगों ने कथित रुप से गरीबों के लिये आया खाद्दयान्न विदेशों में बेच दिया। अभी अदालत के निर्देशानुसार केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो मात्र 5 जिलों मे कार्यवाही कर रही है। बाकी स्थानों में स्थानीय पुलिस बल को यह काम सौंपा गया है।
ध्यान रहे यह वही खाद्दयान्न है जो भारत सरकार विदेशों से महंगे दामों में आयात करती है यह कह कर कि “इस देश में अनाज की पैदावार कम है इसलिये अनाज का आयात आवश्यक है”।
जबकि आप समाचार पढते हैं कि गोदाम न होने के कारण खुले में रखा अनाज सड़ गया।
किसान यह कह कर आत्म हत्या करता है कि खेती की पैदावर का बाज़ार मूल्य लागत से भी कम है।
सच आपके सोचने के लिये है
एक राष्ट्र कवि ने प्रश्न उठाया था:
आत्महत्या कि चिता पर देख कर किसान को
नींद कैसे आ जाती है इस देश के प्रधान को 

Saturday, 21 April 2012

आर्थिक सलाहकार का अर्थ ज्ञान


भारत सरकार अपने आर्थिक सलाहकार से कहलवा रही है:
प्रगति धीमी होने का कारण गठबन्धन की सरकार
कौशिक बसु के अनुसार (कारण):
(1)   मल्टी ब्रांड मे विदेशी निवेश न होना : इससे सीधा फ़ायदा उन विदेशी निवेशकों को होगा और आम जनता के लिये रोज़मर्रा की  वस्तुएं महंगी ही होंगी
(2)   बीमा में विदेशी निवेश न होना : स्पष्ट रुप से जो विदेशी कम्पनियां इसमें निवेश करेंगी उनका फ़ायदा
(3)   ग़ुड्स और  नए सर्विस टेक्स न लगाना : भारत सरकार का एक और कर, आम व्यक्ति कि जेब काटने कि तैय्यारी, फ़लस्वरूप महंगाई की मार और क्योंकि यह सीधा सरकारी राजस्व से सम्बन्ध इसलिये भ्रष्टाचार को बढावा   
(4)   पेंशन फ़ंड मे निवेश न होना : सरकार का स्पष्ट मानना कि वरिष्ठ नागरिकों का भी पैसा विदेशी कम्पनी के हवाले
(5)   सार्वजनिक उपक्रम में विनिवेश न होना : अपने देश के कर से बने और साल दर साल चलने वाले उपक्रम को कौढियों के भाव बेचने जहां सरकार को घाटा वहीं पर नेताओं के स्विस बैंकों के खाते में बढोत्तरी
(6)   सब्सीडी में कमी न होना : गरीबी न मार सको तो गरीबों को ही मार दो। कम से कम विश्व बैंक को यह तो कहेंगे कि गरीबी हटा ली गयी  
क्या आपको कोई भी ऐसा कारण लगता है जिससे आम आदमी की महंगाई, बेरोज़गारी, अशिक्षा और भ्रष्टाचार से निजात मिलेगी    

Thursday, 19 April 2012

राईट टू एजुकेशन का सच


राईट टू एजुकेशन का सच  शिक्षा के अधिकार का कानून 
आँकड़े बताते हैं
वर्ष
जनसंख्या
करोड़
नामांकन
करोड़
नामांकन
प्रतिशत
कक्षा10
1980
68
9.2
13.6%
34.3%
1990
91
13.2
14.6%
33.6%
2006
111
18.4
16.5%
35.5%
2011
119
20.8
17.4%
36.7%
कारण स्पष्ट है कि निम्न वर्ग के लोगों के लिये आज की शिक्षा आजीविका (रोज़ी रोटी) की व्यवस्था नहीं करती है। इसीलिये वह स्कूल छोड़ देते हैं।
अधिकांश भारत की जनसंख्या आज शिक्षा को आजीविका से जोड़ कर देखती है।   
आज जब भारत में 46% लोग कृषी आधारित व्यवसाय करते हैं और 22% विभिन्न स्वरोज़गार में रत हैं एवं 16% घरेलू कार्यों मे लगे हुए हैं तो क्या पाठयक्रम में बदलाव की आवश्यकता नहीं है ? क्योंकि केवल 16% व्यक्तियों के काम में आज की शिक्षा आ रही है  
आज भारत में 22% अनपढ 69% माध्यमिक कक्षा तक और 9% स्नातक या स्नाकोत्तर कक्षा तक पढे हैं, जबकि 73% स्नातक कला संकाय से हैं।  
सम्पूर्ण विश्व में लगभग 95% व्यक्ति 15 से 35 उम्र के गैर पारम्परिक शिक्षा प्राप्त करते हैं जिसमें बढईगिरी, मोचीगिरी, विद्युत कर्मी, पानीकर्मी, रसोईया, इत्यादि शामिल हैं। इस शिक्षा से उनकी आजीविका भी चलती है और उन्हें अपने ज्ञान को जीवन में उपयोग में लाने में भी सफ़लता मिलती है फ़लस्वरूप उनकी इस शिक्षा में रुची बनी रहती है

भारत में इस क्षेत्र में काफ़ी रोज़गार के अवसर होने के बावजूद भी लगभग 2% लोग इस प्रकार की औपचरिक शिक्षा प्राप्त करते हैं परिणाम स्वरूप देश के तकनीकि कारीगरों का स्तर गिर गया जिससे न तो वह कारीगर अपनी आजीविका का और न ही अपने ज्ञान का स्तर बढा पाता है, क्योंकि वह भारत के औद्योगिक क्षेत्र के काम का नहीं है।                 
भारत सरकार ने इस बजट मे 74056 करोड़ स्कूली शिक्षा के लिये रखा है तो क्या यह आपके कर के धन का सद्उपयोग है ? 

Monday, 16 April 2012

पाकिस्तान के लिये निवेश


एक समाचार के अनुसार अब भारत सरकार कुछ क्षेत्रों में पाकिस्तान के लिये निवेश के दरवाजे खोल रही है। भारत सरकार इसे पाकिस्तान से अपने बढते सम्बन्धों का ब्यौरा दे रही है। प्रश्न है कि क्या हमें पाकिस्तान जैसे देश से निवेश स्वीकार करना चाहिये ? और क्या पाकिस्तान के पास निवेश करने के लिये धन है ? हम इतने भुक्खे नन्गे, गये गुज़रे है कि उस देश से निवेश करवा रहे हैं जिस देश का तार तार अमेरिका का आर्थिक गुलाम है। स्पष्ट है कि पाकिस्तान के रास्ते अमेरिका एवं अन्य देश भारत में धन भेजेंगे। क्या यह अमेरिका की एक और चाल तो नहीं है हमारी प्रगति पर चोट कराने के लिये और अदभुत बात है कि वाल मार्ट के समय हर चैनल पर बोलने वाली समस्त पार्टियां अब कहां खमोश बैठी हैं। अभी और देखियेगा भविष्य में पाकिस्तान जैसे देश को जब नकद लेन देन की छूट दे दी जायेगी तब आराम से भारत में नकली नोटों का आवागमन हो जायेगा जो कि भारत की अर्थ व्यवस्था को चरमरा देगा।
परिणामस्वारूप नया कर्जा भारत को और फ़िर नया स्विस बैंक में नेताओं का पैसा
पहले भारत सरकार हर बार निवेश के समाचार को बताती थी अब जब से लोगों को इसकी सच्चाई का पता लग गया है और लोग विरोध प्रकट करने लग गये हैं तब से सरकार सब काम चुपचाप कर रही है और सभी समाचार चैनलों को इस प्रकार के समाचार पर टिप्पणी न करने का निर्देश दे देती है।       

Sunday, 15 April 2012

भारत का निर्यात 300 अरब डालर के पार


आज हर समाचार पत्र मे सुर्खियां है कि भारत का निर्यात 300 अरब डालर के पार हो गया है। परन्तु कहीं पर इस बात पर खेद नहीं है कि हमारा आयात 485 अरब डालर हो गया है। समस्त अर्थशास्त्री यह भूल रहे हैं कि 185 अरब डालर का विदेश व्यापार घाटा किस देश के विकास की पहचान है ? 
कल्पना करें कि यह व्यापार घाटा यदि रुपये मे बदला जाये तो यह 9,250 अरब रुपये होते हैं अर्थात प्रति व्यक्ति 7400 रुपये।
इस वर्ष भारत का निर्यात बढा है 22% जबकि इसी अवधि में आयात मे 41% की बढोत्तरी दर्ज की गयी है।  

Friday, 13 April 2012

विमान उद्योग में एफ़ डी आई को 49% की मन्ज़ूरी


भारत मे विमान उद्योग में एफ़ डी आई को 49% की मन्ज़ूरी का सच
घरेलू क्षेत्र में इस समय

जेट एयर वेज़         26%      105 करोड़ लाभ
गो एयर             08%      150 करोड़ लाभ
ईंडिगो               17%      650 करोड़ लाभ
स्पाईस जेट           13%      70 करोड़ लाभ
किंग फ़िशर          19%      1467 करोड़ नुकसान
ईंडियन एयरलाईन्स    17%      9997 करोड़ नुकसान
आंकड़े बताते हैं कि भारत का यह उद्योग पूर्णतया सक्षम है, परन्तु जिन जिन का नुक्सान है वह या तो सरकारी है या सरकार के सांसद की कम्पनी है।
यह नुकसान है नहीं परन्तु दिखाया गया है कारण जानिये
और तो और किंग फ़िशर     का तो खर्चा और भी कम होना चाहिये क्योंकि उनकी परिचारिका के कपडों का खर्चा भी कम है उनकी पोशाक ही ऐसी बनायी गयी है।  
दरअसल इस उद्योग में लाभ देख कर काफ़ी समय से विदेशी कम्पनियां भारत मे व्यापार शुरु करना चाहती हैं। 2007 से उनका प्रयास चल रहा है जब श्री प्रफ़ुल महन्त के पास मन्त्रालय था परन्तु दो कम्पनियों को छोड कर सब इसका विरोध कर रही थी, तब एक सुनियोजित साज़िश के तहत किंग फ़िशर ने अपना नुकसान बढाना शुरु किया क्योंकि वो राज्य सभा सांसद की कम्पनी है यानि सरकारी लोगों की है। श्री अजीत सिंह के आने के बाद अब इस समय चुपचाप न तो इसकी चर्चा हुई और न ही अखबार या किसी अन्य मीडिया ने इस पर टिप्पणी की है कारण स्पष्ट है।  
नेताओं को पैसा दिया गया स्विस बैक में और भारत एवं भारतीयों को मरने दो अपने हाल में
धन्य वाद        

Sunday, 8 April 2012

स्वर्ण उध्योग पर सरकरी मार


अब आपको भारत सरकार के एक निर्णय के विषय में खुलासा करते हैं!
भारत सरकार ने इस बजट में स्वर्ण निर्यात में शुल्क को 2% से 4% कर दिया और सभी स्वर्ण आभूषणों पर 0.3% का आबकारी शुल्क लगा दिया।

(1)     इसके फ़लस्वरूप भारत जो विश्व में सबसे अधिक सोने का आयात करता है (2011 मे 967 ट्न) का अनुमानत: आयात 30% कम होने की आशंका है  
(2)     सरकार के खज़ाने में लगभग 100 रु प्रति ग्राम का धन आयेगा
(3)     भारत का स्वर्ण उध्योग जिसमें 98% छोटे दुकानदार है और जो कारीगर है उनकी रोज़ी रोटी पर सीधी मार क्योंकि इस स्तर का है कि आबकारी विभाग से समबन्धी कागज़ात बनाने में सक्षम ही नहीं है
(4)     अनुमानत: लगभग एक करोड कारीगरों के जीवन पर दुष्प्रभाव होगा     
  
आईये अब समझते हैं कि इससे भ्रष्टाचार कैसे बढेगा !
(1)     जब अधिकांश लोग सोने के ज़ेवर बिना बिल के खरीदेंगे तो (1000 रु प्रति तोला सस्ता) बिक्री कर विभाग के अधिकरियों के भ्रष्टाचार का बोलबाला
(2)     हर छोटे से छोटे कारीगर को आबकारी विभाग मे पंजीकरण करवाना होगा और रोज़नामचा, रोज़ की आवक, रोज़ की बिक्री और रोज़ का लेजर बनाना होगा। कल्पना करें कि एक दुकानदार या कारिगर जिसकी मासिक आय 10,000 से 30,000 के बीच में है (60 लाख लोग) इतना लेखा जोखा रखने की न तो क्षमता रखता है न ही किसी लेखाकार को काम दे सकेगा परिणाम होगा फ़िर भ्रष्टाचार
अब यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार बढाने में सरकारी तन्त्र महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है   

Tuesday, 3 April 2012


ईन्डिया अगेन्स्ट करप्शन: आज के इस परिवेष में हम लोगों ने यह लगभग यह मान लिया है कि कोई भी सरकारी कार्य बिना भ्रष्टाचार के नहीं हो सकता है, क्या यह हमेशा से ऐसे ही था? यह कब से शुरु हुआ? क्या हम कुछ बदलाव ला सकते हैं ? क्या हमें इसे स्वीकार करना ही पडेगा? क्या हम कुछ भी कर सकते हैं? ऐसे ही कितने प्रश्न आज के भारतीय के पास हैं। वह शायद इस भ्रष्टाचार के इतिहास पर या इसके जन्म पर वह न विचारता हो परन्तु अधिकान्श भारतीयों के मन में यह विचार तो है कि इस प्रकार के भ्रष्ट तन्त्र को मान लेने कि अतिरिक्त क्या मेरे पास कोई विकल्प है??

आंकडे बताते हैं कि इस भारत में लगभग 50% केवल रिशवत देते हैं। लगभग 30% भारतीय ऐसे हैं जो रिश्वत ले कर के अपने उपर के अधिकारियों को अपना हिस्सा काट कर दे देते हैं। वे लोग शायद ऐसा कर के बहुत प्रसन्न न भी हों तो भी उन्होंने इस प्रकार के भ्रष्ट तन्त्र को स्वीकार कर लिया है। 10% ऐसे भी हैं जो शायद इस भ्रष्ट तन्त्र का मान्सिक विरोध विरोध तो करते हैं परन्तु शायद विरोध के दुश्प्रभाव के भय से इसको स्वीकार कर लेते हैं । बाकी 10% ऐसे जो इस भ्रष्ट तन्त्र को प्रसन्नता से स्वीकार करते है। कदाचित यही वो भारतीय लोग हैं जो आज इस भ्रष्ट तन्त्र के संगरक्शक कहे जा सकते है              
जन लोक पाल बिल : जब अन्तिम दो प्रश्नों (क्या हमें इसे स्वीकार करना ही पडेगा? क्या हम कुछ भी कर सकते हैं?) का उत्तर नकारात्मक आया। तब कुछ बुद्धिजीवियों ने इस पर विचार किया। और एक समाधान प्राप्त करने कि लिये, जो इस भ्रष्टतन्त्र के शिकार और इसको चलाने वालों से इसकी चर्चा की गयी। भारत के हर वर्ग और हर क्षेत्र के लोगों ने इस पर सुझाव दिये। इस कार्य में समस्त भारत के बुद्धिजीवियों का योगदान रहा। समस्त सुझावों का समायोजन करते हुये एक व्यापक बिल क गठन किय गया। जब इसे कागज़ पर उतार गया तो इसका नाम रखा गया जन लोकपाल बिल। आज भी इस लोकपाल बिल में सुझावों को आमन्त्रित किया जाता है। समस्त भारत का कोई भी व्यक्ति इसमें अपना सुझाव दे सकता है।

राजनीतिक स्थिति: हम सब ने देखा कि इस सत्र में सरकार और विरोधी पार्टियों ने जनलोकपाल बिल के साथ कैसा व्यवहार किया। किसी भी राजनीतिक पार्टि ने इसका समर्थन नहीं किया। कोइ भी पार्टि इसका अपवाद नहीं है। कारण स्पाष्ट है कि यही वो राजनीतिक लोग हैं जिन्हें इस भ्रष्टतन्त्र का लाभ होता है और निजी स्वार्थ के चलते वो इसे पास नहीं करने  चाहते हैं

सामाजिक स्थिति: इसके विपरीत विभिन्न सर्वे से ये पता चलता है कि 80% भारतीय इस भ्रष्टाचार विरोधि बिल का स्वागत करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस बिल के प्रावधानों को पूर्ण रूप से नहीं मानते, परन्तु भ्रष्टाचार विरोधि नीतियों का पूर्ण समर्थन करते हैं। इस प्रकार के लोगों को अपने सुझाव देने के लिये फ़िर से आमन्त्रित किया जाता है।

नोएडा का आन्दोलन पर प्रभाव: नोएडा का भौगोलिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण स्थान पर है। आज की भारत की राजधानी के समीप यह एक ऐसा स्थान जो औद्योगिक, व्यापारिक और रिहायिशी दृष्टि से प्रगतिशील क्षेत्र है। यहां पर हर वर्ग के लोगों क आगमन हो रहा है। इसी कारण से नोएडा भारत के उन क्षेत्रों मे मान जाता है जहां पर भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। यहाम के लोगों का यथोचित योगदान सान्दोलन को नया आयाम दे सकता है क्योंकि यहां के लोग इस भ्रष्ट्तन्त्र को ठीक प्रकार से जानते है। दूसरे यह राजधानी के निकटवर्ती क्षेत्र मे है।

नोएडा के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र मे प्रभाव: राजधानी के निकटवर्ती क्षेत्र मे होने के कारण यहां का भ्रष्टतन्त्र कई गुना ज़्याद है। इसी कारण से यहां पर दुश्प्रभाव भी अधिक है। इस बात को पुराने बाशिन्दे (लोग) बखूबी जानते हैं। जो नया व्यापारिक या औद्योगिक इकाई यहां पर आ रही है वह इस क्षेत्र कि प्रगति को यहां के माल या शापिन्ग काम्प्लेक्स से आंकति है जो शायद ठीक थाक लगति है। परन्तु जैसे हि कोई किसी भी सेक्टर या नांव मे प्रवेश करता है तो यह्ह क जीवन भ्रष्ट तन्त्र के कारण ठप्प दिखायी देता है। ग्रामीणों को अपनी ज़मीन कौडियों के भाव बेचनी पड जाति है जो उसकी रोज़ी रोटी का ज़रिया है। और लगभग 70% नोएडा नांव मे ही है।
जहां तक यहां पर बने भारत के रक्षा मन्त्रालय (वायु सेना, थल सेना और जल सेना) के लोगों की बात की जाये तो अधिकांश यहां पर सेवा निवृत्त लोगों कि बहुतायत है, जो अपना जीवन यापन पेंशन से करते हैं। उन लोगों का भी इस भ्रष्ट तन्त्र में जीना बहुत कठिन हो चुका है