एक समाचार के अनुसार अब भारत सरकार कुछ क्षेत्रों में पाकिस्तान के लिये निवेश के दरवाजे खोल रही है। भारत सरकार इसे
पाकिस्तान से अपने बढते सम्बन्धों का ब्यौरा दे रही है। प्रश्न है कि क्या हमें
पाकिस्तान जैसे देश से निवेश स्वीकार करना चाहिये ? और क्या पाकिस्तान
के पास निवेश करने के लिये धन है ? हम इतने भुक्खे नन्गे, गये गुज़रे है कि उस देश से निवेश करवा रहे हैं
जिस देश का तार तार अमेरिका का आर्थिक गुलाम है। स्पष्ट है कि पाकिस्तान के रास्ते अमेरिका एवं अन्य देश भारत
में धन भेजेंगे। क्या यह अमेरिका की एक और चाल तो नहीं है हमारी प्रगति पर
चोट कराने के लिये और अदभुत बात है कि वाल मार्ट के समय हर चैनल पर बोलने वाली
समस्त पार्टियां अब कहां खमोश बैठी हैं। अभी और
देखियेगा भविष्य में पाकिस्तान जैसे देश को जब नकद लेन देन की छूट दे दी जायेगी तब
आराम से भारत में नकली नोटों का आवागमन हो जायेगा जो
कि भारत की अर्थ व्यवस्था को चरमरा देगा।
परिणामस्वारूप
नया कर्जा भारत को और फ़िर नया स्विस बैंक में नेताओं का पैसा
पहले
भारत सरकार हर बार निवेश के समाचार को बताती थी अब जब से लोगों को इसकी सच्चाई का
पता लग गया है और लोग विरोध प्रकट करने लग गये हैं तब से सरकार सब काम चुपचाप कर
रही है और सभी समाचार चैनलों को इस प्रकार के समाचार पर टिप्पणी न करने का निर्देश
दे देती है।
पर जो व्यापार तस्करी से चलता था वो शायद अब क़ानूनी रूप से हो सकता है और अब ये बात हमारे सरमयेदारों पर टिकी है की वो किसका कारोबार करना चाहते है, आम जनता के हितों की बात करते है, या अमेरिका की सरपरस्ती का असर होगा.
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