भारत
सरकार अपने आर्थिक सलाहकार से कहलवा रही है:
प्रगति
धीमी होने का कारण गठबन्धन की सरकार
कौशिक
बसु के अनुसार (कारण):
(1) मल्टी ब्रांड मे विदेशी निवेश न
होना : इससे सीधा फ़ायदा उन विदेशी
निवेशकों को होगा और आम जनता के लिये रोज़मर्रा की
वस्तुएं महंगी ही होंगी
(2) बीमा में विदेशी निवेश न होना : स्पष्ट रुप से जो विदेशी कम्पनियां इसमें निवेश करेंगी उनका
फ़ायदा
(3) ग़ुड्स और नए सर्विस टेक्स न लगाना : भारत सरकार का एक और कर, आम व्यक्ति कि जेब काटने कि तैय्यारी, फ़लस्वरूप
महंगाई की मार और क्योंकि यह सीधा सरकारी राजस्व से सम्बन्ध इसलिये भ्रष्टाचार को
बढावा
(4) पेंशन फ़ंड मे निवेश न होना : सरकार का स्पष्ट मानना कि वरिष्ठ नागरिकों का भी पैसा
विदेशी कम्पनी के हवाले
(5) सार्वजनिक उपक्रम में विनिवेश न
होना : अपने देश के कर से बने और साल
दर साल चलने वाले उपक्रम को कौढियों के भाव बेचने जहां सरकार को घाटा वहीं पर
नेताओं के स्विस बैंकों के खाते में बढोत्तरी
(6) सब्सीडी में कमी न होना : गरीबी न मार सको तो गरीबों को ही मार दो। कम से कम विश्व
बैंक को यह तो कहेंगे कि गरीबी हटा ली गयी
क्या आपको कोई भी ऐसा कारण लगता है जिससे आम आदमी
की महंगाई, बेरोज़गारी, अशिक्षा और भ्रष्टाचार से निजात मिलेगी
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